यूं ही बैठे बैठे एक एहसास
चुपके से दिल में समा गया
उस पल में ऐसा जुनून था
कि जैसे दिल और हवा में तकरार हो गई हो
और वह एहसास कुछ यूं था
कि उसे हवा की जरूरत भी न थी
इसलिए नहीं कि उसने अपनी मौत कबूल की थी
मगर इसलिए
कि उसने रेगिस्तान में जीना सीख लिया था
बिना हवा के भी वो एहसास कुछ यूं जिंदा था
कि बाकी सब अहसास उसके सामने
कुछ फीके से पड़ गए थे
वो एहसास कुछ यूं था
की रग रग को उसकी जरूरत सी हो गई थी
इस तरह कि जैसे ये कहीं खोया ही न था
उस एक पल में ऐसा जुनून था
कि जैसे आज पहली बार सांस ली हो
जैसे आज पहली बार रहमत हुई हो
अब और क्या लिख डालूँ इस एहसास के बारे में
बस इतना जानती हूं कि मैं जिंदा हो गई
मौत जैसे कुछ दूर सी हो गई
यूं ही बैठे बैठे एक एहसास
चुपके से दिल में समा गया

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