इश्क हमारा

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इश्क हमारा उनके प्यार का मोहताज नहीं है
टूट कर किया है कोइ मज़ाक नहीं है
वो तैर रहे हैं किनारे के पास
हम दरिया के उस मोड़ पर हैं जहाँ कोई किनारा नहीं है
उनकी नज़र टिकी है दरवाज़े पर
हम उस जगह पहुंचे हैं जहाँ कोई दरो-दीवार नहीं है
वो कहते हैं कि बेइंतहा प्यार करते हैं हम तुम्हे
मगर इस इश्क में चूर होने को वो राज़ी नहीं हैं
इश्क हमारा उनके प्यार का मोहताज नहीं है
टूट कर किया है कोइ मज़ाक थोड़ी है…

Drawing by me (inspo from pinterest)
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