वो पत्तों की सरसराहट
वो हवा से जुगलबंदी
वो पत्तियों के घूंघट में छिपा चांद
वो सुकून की आवाज़
जैसे सारी दुनिया
काले आसमान की चादर ओढ़ कर सो गई हो
और चांद कहानी सुना रहा हो जैसे
उन जागने वालों को
जो खामोशी का दामन थाम
धीरे-धीरे नींद के आगोश में जा रहे हो…

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