जंग है एक मुसलसल
एक बाहर एक अंदर
किसी दिन
जीत का जश्न मनाऊं
किसी दिन
हार के आंसू रोऊं
हर मसले
की गहराई नाप कर
मुसलसल गोते लगाऊं
समझा मैंने
इस जंग से
कि हार जीत बस एक
बहाना है
हमें तो बस खौफ को
मन से दूर भगाना है
क्योंकि हर हार में भी
कहीं न कहीं
एक छोटी सी जीत
छुपी हुई है…

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